ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

रक्तदान


#दिनांक:-14/6/2024
#शीर्षक:- रक्तदान

भारत देश का भरत बनूँ ,
किसी जीवन का रक्तकमल बनूँ ।

संतुष्टि और खुशी का हो आगमन,
मेरे रक्त से संवर जाए किसी का जीवन ।

परोपकार जीवन में कुछ कर जाऊँ,
किसी के लिए गर कुछ नहीं कर सकती ,
तो रक्तदान कर कुछ हद तक तर जाऊँ ।

हैरान ना होना कुछ नुकसान ना होगा,
रक्त-दान कर तेर-मेरा ही मान होगा।

जीवन पर्यन्त बस एक नेक काम,
करो स्वंय खुशी से तुम रक्तदान।

कर्म अनेक हैं जिससे बनो सुजान,
सर्वश्रेष्ठ कर्म करो करके रक्त दान।

तेरा रक्त किसी के लिए बन जायेगा संजीवनी,
वैधव्यता पलटवार कर बना देगी सुहागिनी।

कमल से खास कमल की मुरार बन जाओगे,
एक नहीं, अनेक को नया जीवन दे पाओगे।

आज से ही ना होने दो किसी का नुकसान,
स्वयं से खुशी-खुशी करो अपना अमूल्य रक्तदान ।

(स्वरचित)
प्रतिभा पाण्डेय "प्रति"
चेन्नई

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