ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

रक्षा बंधन पर्व शोभित, भाई बहन अथाह गर्व -महेन्द्र कुमार

रक्षा बंधन पर्व शोभित, भाई बहन अथाह गर्व 
******************************


अंतर्संबंध अपनत्व प्रवाह,
बहन पावन पूज्य स्थान ।
सुशोभित निज संस्कृति,
कर रक्षा संकल्प आह्वान ।
घर द्वार चहक महक,
जन पटल दर्श भाव कर्व ।
रक्षा बंधन पर्व शोभित,भाई बहन अथाह गर्व ।।


उर श्रृंगार पुनीत मधुर,
वचन सिद्ध दिव्य मोल ।
बन अभिरक्षा कवच,
मृदुलता स्पंदन बोल ।
जीवन बना आनंद रथ,
सिंहासन सदृश मर्व ।
रक्षा बंधन पर्व शोभित,भाई बहन अथाह गर्व  ।।

अनुभूति बन अभिव्यक्ति ,
अनंत स्नेह प्रेम धार ।
मोहक डोर अभिवंदित,
परिवेश खुशियां बहार ।
मुस्कान धर चेहरों पर,
दर्शित शुभकामनाएं सर्व ।
रक्षा बंधन पर्व शोभित, भाई बहन अथाह गर्व ।।

बहन अंतस हिलोरित,
सहोदर यश समृद्धि कामना ।
भ्राता संकल्पित रक्षा वचन,
भगिनी जीवन मंगल भावना ।
मान सम्मान मर्यादा निर्वहन,
परंपरा संस्कार मय अथर्व ।
रक्षा बंधन पर्व शोभित,भाई बहन अथाह गर्व ।।

.................................................................
महेन्द्र कुमार
(स्वरचित मौलिक रचना)
......................................................................

Post a Comment

0 Comments