ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

परवाज़ उड़ान..... कल्पनाओं की चंद्रयान-3-बृजबाला गुप्ता

परवाज़ उड़ान..... कल्पनाओं की
चंद्रयान-3


तुम हो हमारे चंदामामा
हमारा तुम्हारा रिश्ता पुराना
विक्रम को गोदी में जो बैठाया
अब ये प्रमाणित हो गया मामा

सदियों से इच्छा थी मन में
हम भी आएं तेरे आँगन में
आज हुई अभिलाषा पूरी
लहराया झण्डा दक्षिण पोल में

विक्रम चंद्रयान उतरा चाँद के द्वार
इसरों वैज्ञानिको ने किया चमत्कार
चंद्रमा सतह पर छपी भारत की पहचान
हो रही विश्व में भारत की जय जयकार

भारत हमारा देश महान
चाँद पर पहुचेंगें एकदिन थे अरमान
ले प्रेम के धागे,विक्रम चला चाँद के पास                                    प्रेम के धागे पहुंच जाएं धरती को थी आस
बढा़या प्रेम का हाथ मिला धरती को सम्मान

स्वरचित रचना
बृजबाला गुप्ता

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