ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

भाई को संसार मुबारक-पिंकी अरविन्द प्रजापति

भाई को संसार मुबारक

सावन का बुधवार मुबारक,
दिन प्यारा गुरुवार मुबारक,
भाई बहन का रक्षा बंधन
का पावन त्योहार मुबारक।

चूड़ी लटकन दार मुबारक,
साड़ी गोटेदार मुबारक,
पीहर जाने को जब बहनें
सजती वह शृंगार मुबारक।

बस की सेवा यार मुबारक,
खुश हो तो सरकार मुबारक,
लड्डू, पेड़ा और सिवाई
सबको लच्छेदार मुबारक।

घर मां का हर बार मुबारक,
पापा का वह प्यार मुबारक,
बचपन की वह तू- तू मैं- मैं
फिर होती तकरार मुबारक।

भाई को घर द्वार मुबारक
वंशागत हकदार मुबारक
पर करता जब विदा बहन को
आंसू की जलधार मुबारक।

भाभी की दुत्कार मुबारक
भाई पे अधिकार मुबारक
मगर जरूरत पड़े कभी तो
भाभी का व्यवहार मुबारक।

सजी हुई बाजार मुबारक,
राखी की भरमार मुबारक,
बंधी कलाई पे जब राखी
खुशियों का संसार मुबारक।

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©पिंकी अरविन्द प्रजापति ✍️
सिधौली सीतापुर उत्तर प्रदेश
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