💭सावनी वर्षा💭
अति पावन सावन वर्षा छावन,
घनघोर घटा नभ में घहराई।
चम चम चपला चमक चमक,
अति चकाचौंध चहुओर चेताई।।
अम्बुद अम्बु अवनि पर आके,कल कल सलिला जाय समाई।पल पल पवन बहे बड़ सर सर,झर झर झरने ध्वनि झहराई।।
टर टर स्वर में टर्रा दादुर,
अति कूदि कूदि तोय में तैराई।
घर घर नाद नीर बहि उफना,
जा सलिला में अति सैराई,
झक झक झोरि झोरि झकझोरत,झूमि झूमि गाछ तने टकराई।घर घर ओरी रहा नियन चू,मानो नैना नीर चुआई।।
मन भावन पावन अति सावन,
देखि देखि दिल दंग रह जाई।
छम छम ध्वनि गिरती बूंदों में,
करते कारुष धान रोपाई।।
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कलम से✍️
कमलेश कुमार कारुष
मिर्जापुरी
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