ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
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गीता का तो सार यही है-डाॅ. योगेश सिंह धाकरे "चातक" [ ओज कवि ] आलीराजपुर   म.प्र.
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