ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
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भगवद्गीता ( प्रथम अध्याय )/ श्लोक संख्या - 1
आत्म -प्रबोध
सृष्टि कर्ता विश्वकर्मा प्रजापतिः(ऋग्वेद दशम्- मण्डल)-
गीता का तो सार यही है-डाॅ. योगेश सिंह धाकरे "चातक" [ ओज कवि ] आलीराजपुर   म.प्र.
 क्या मैं शरीर ही हूँ-उससे भिन्न नहीं?
आत्मचिंतन के क्षण
 गलत विश्वास
वेद त्रयी-चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा "अकिंचन"गोरखपुर।
मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है
आत्मचिंतन के क्षण
आत्म शुद्धि कीजिये
क्षणिक अस्तित्व पर इतना अभिमान
कर्त्तव्य पालन का अविरल आनन्द
नाम आश्रय
पितरों को श्रद्धा दें, वे शक्ति देंगे
आत्मचिंतन के क्षण-पं श्रीराम शर्मा आचार्य
जीवन का सबसे बड़ा पुरुषार्थ और संसार का सबसे बड़ा लाभ
आत्मचिंतन के क्षण-पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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