ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
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दिलबर तेरी परछाई हूँ
प्रतिभा हो अनाड़ी दिखना नहीं है
कहानी
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