ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

हिन्दी के प्रति सोच बदलने की जरूरत- लेखक- तुलसीराम 'राजस्थानी'

हिन्दी के प्रति सोच बदलने की जरूरत

          हमारा भारत देश एक बहुभाषी देश है। यहां सभी धर्म-सम्प्रदाय के लोग निवास करते हैं। अनेकता में एकता हमारे देश की विशेषता रही है। हमारा देश कश्मीर से कन्याकुमारी तक अनेक राज्यों में बंटा हुआ है। क्षेत्रानुसार यहां के लोगों के अलग-अलग रहन-सहन, खान-पान व रीति-रिवाज भी एक समान नहीं हैं। यहां भिन्न-भिन्न प्रकार की बोलियां बोली जाती हैं, लेकिन हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो सर्वाधिक बोली व समझी जाती है। हिंदी की शब्दावली इतनी विशाल है कि अन्य कोई भाषा इसका मुकाबला कर ही नहीं सकती है।  इसी वजह से भारत की संविधान सभा द्वारा 14 सितम्बर, 1949 को एकमत से हिंदी को राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान की गई। 

          हिन्दी हमारे देश का गौरव है। केन्द्र सरकार द्वारा हिंदी को अधिकाधिक प्रोत्साहन देने के लिए 'राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरुस्कार' व 'राष्ट्रभाषा गौरव पुरुस्कार' देने की घोषणा की गई, जो प्रतिवर्ष इस क्षैत्र में काम करने वालों को माननीय राष्ट्रपति के द्वारा प्रदान किये जाते हैं। इन सबके बावजूद भी यदि धरातल पर देखा जाए तो हिंदी की आज क्या दशा है, ये किसी से छुपी हुई नहीं है। आज देखा जाए तो अंग्रेजी हमारे दैनिक जीवन में बहुत ज्यादा हावी होने लगी है। हमारे देश में हिंदी को जो गौरव मिलना चाहिए था वह आभी तक हासिल नहीं हो पाया है। विडम्बना की बात है कि आज हिन्दू देश में हिन्दीभाषी को गंवार समझा जाता है। 

          हिन्दी का शब्दकोष तो विशाल है ही, इसकी भाषा भी इतनी भावपूर्ण है कि अन्य कोई भाषा इसका मुकाबला नहीं कर सकती है। जैसे अंग्रेजी में पैर को केवल LEG कहा जाता है, वहीं हिंदी में इसी पैर के न जाने कितने रूप हो जाते हैं। जैसे भगवान के पैर को पाद, अपनों से बड़ों व आदरणीय के पैर को चरण, आगे बढ़ना हो तो कदम, पैर में घुंघरू बंध जाए तो पग, फिसल जाएं तो पांव, अगर कोई पैर से मारे तो लात और अगर गधा मारे तो दुलत्ती। हमारे देश में हिन्दी भाषा को गौरवशाली मुकाम हासिल हो सके, इसके लिए केवल हिन्दी दिवस मना लेने से ही हिन्दी का भला होने वाला नहीं है, अपितु देश के प्रत्येक नागरिक को हिन्दी के प्रति अपनी सोच को बदलने की सख्त आवश्यकता है।
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लेखक- तुलसीराम 'राजस्थानी'
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