ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

अकेलापन-प्रतिभा पाण्डेय "प्रति" चेन्नई

शीर्षक:- अकेलापन ।

अकेली मैं साथ अकेलापन,
अकेली खुद अकेला हमदम,
अकेले की खुशी अकेले का गम, 
अकेला हँसाये अकेला दे सितम,
अकेला रोये तो अकेला पिये रम,
अकेली तन्हाई अकेला धुंधलापन, 
अकेला खुशनसीब अकेला खोजता अकेला हमदम,
अकेला डरता सताता अकेलापन।

अकेले में याद आयी माँ, खेलता बचपन ,
अकेला पीछा नहीं छोडता,
अकेले ने ले लिये कितनों के दम, 
दम अकेला खुद को खंगाले,
भारी है बिताना जीवन,
छाया है अकेलापन,
 अश्क से है आँख नम ,
अकेलेपन का शिकार,
 हर परिवार में अहम्,
अकेला पागल कर दे,
 शून्य हो जाए तन-मन ,
अकेले का सितम अकेले का गम ,
अकेला अकेले में मार रहा है दम |

प्रतिभा पाण्डेय "प्रति"
चेन्नई

Post a Comment

0 Comments