ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

भक्ति गीत-आलोक शर्मा अजनबी

भक्ति गीत

रामजी की गाथा सुनाएं।
रामजी सी हो भावनाएं।।
रघुकुल जैसा कुल मिले।
कोशल्या सा वात्सल्य  मिले     
कैकयी का भी वंदन हो।              
सब घर में रघुनंदन हो।
जानकी जैसी सहभागिनी हो।           
तो वन गमन भी चंदन हो।।

अहिल्या को उद्धार मिले ।      
शबरी जैसा प्यार मिले।।
हनुमंत जैसे मीत मिले तो।         
हर रण में फिर जीत मिले ।।
दुर्गुणों  का वध  हो।             
भारत फिर  से अवध हो ।।

रोज जले दीप आशा के कि        
वह आ रहे हैं राम  ।
आओ सब मिलकर कहे
जय श्री राम जय श्री राम।।

आलोक अजनबी

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