दोनों ने ही अपने-अपने फर्ज को निभाया है।
किसी ने वक्त को गवांया है किसी ने वक्त को कमाया है।।
कोई रोया है किसी के झूंठे प्यार में फंसकर।
किसी ने विश्वास मे फंसाकर अपनों को रुलाया है।।
चलते रहे जिनके लिए हम कांटों पे हंस कर ।
मेरे लिए उसी ने हरदम काँटों को ही उगाया है।।
हम तो वैसे भी मर रहे थे उसकी जाने किस अदा पर।
पर उसकी बेसब्र दगा ने ही मेरे दिल को जगाया है।।
पलटकर ,घायल परिन्दा, कैसे देखे उसे जीवन के अन्त तक।
जिसने दर्द की इम्तिहां का ऐसा नजारा दिखाया है।।
जय हिन्द, वंदेमातरम ,भारत माता की जय ।
घायल परिन्दा

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