मां की आराधना
प्रथम दिवस मां शैलपुत्री दर पर शीश झुकाऊं।
दिवस दूसरा ब्रह्मचारिणी पूजा थाल सजाऊं।
दिवस तीसरा चंद्र घंटे मां अद्भुत शक्ति अपार।
चौथे दिन मां कुष्मांडा महिमा अपरम्पार।
नमन करूं स्कंद मातु को पंचम दिवस मनाऊं।
दिव्य रुप माता कात्यानी षष्टम ज्योति जलाऊं।
सप्तम दिवस मां कालरात्रि अद्भुत शक्ति वास।
दिवस अष्टमी महागौरी घर_ घर करें निवास।
दिवस नवम मां सिद्धि दात्री पावन अद्भुत नाम।
आस्था की शक्ति लिए मां का अद्भुत धाम।
नव दुर्गे नव रूप में करती कृपा अपार।
तेरे मां आशीष से चमके यह संसार।
इस जग के कल्याण हित लिया दिव्य अवतार।
मां तू है इस जग की रक्षक नमन करूं प्रति वार।
अर्पित तुझ पर पुष्प है पंकज खिलती क्यारी क्यारी।
"दिनकर" नव दुर्गा को ध्याते खिले सदा फुलवारी।।
रचनाकार
पंकज सिंह "दिनकर"
(अर्कवंशी)लखनऊ उत्तर प्रदेश


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