....मै भी उड़ना चाहती.....
सपनों में जीना चाहती,
जिंदगी से लडना चाहती हूं
मै जीवन को तलाशना चाहती हूं
हीरे की तरह चमकना चाहती ..
संस्कारों के परदे को हटाना चाहती,
मै दुनिया की बेडियों से आजाद होना चाहती हूं,
कमबख्त जिंदगी को कुछ देना चाहती हूँ ..
अपना आशय लेकर पंख फैलाना चाहती हूं।
ऐ जिंदगी,
बस एक मौका खोजना चाहती हूँ।
मंजिल की खोज में ,
भटकना चाहती हूं।
जीवन मे कुछ करना चाहती हूँ
नौशाबा जिलानी सुरीया

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