शीर्षक:-उपासिका हूँ तेरी।
भक्त वात्सल्यता दिखाओ माँ ,
मुझ अनाथ की क्षुधा मिटाओ माँ।
माता ब्रह्मचारिणी!
मेरे मन को चंचल ना बनाओ माँ ।
राह में कहीं,
मैं भटक ना जाऊँ,
राह दिखाओ माँ ।
उपासिका हूँ तेरी!
तप-त्याग-वैराग्य-सदाचार और संयम,
की क्षमता बढाओ माँ ।
दिन रात तेरी शरण में हूँ
ज्ञान गंगा की सरिता
मेरे मन में बहाओ माँ |
दूध, शक्कर का प्रसाद चढाऊँ ,
कमल का माला गले पहनाऊँ,
हर नवरात्री नौ देवी की ,
कर जोड़कर अशीष मागूँ माँ ।
डगर कठिन, मंजिल बहुत दूर है ,
'प्रतिभा' बेटी की राह से तम मिटाओ माँ |
प्रतिभा पाण्डेय 'प्रति'
चेन्नई।

0 Comments