बाल कविता
शीर्षक- @कदम-कदम बढ़ाए जा@
हे नन्हे-मुन्हे प्यारे बच्चों,
चलते - चलते धाए जा।
पीछे ना यूं मुड़के देखो,
कदम - कदम बढ़ाए जा।।
सदा ठान अरमान दिलों,हिम्मत कभी ना हारना।जब भी दिखे कष्ट सामने,दिल में धीरज धारना।।निश-दिन अथक परिश्रम से,सद मंजिल को पाए जा।पीछे ना यूं मुड़के देखो,कदम - कदम बढ़ाए जा।।
हर वक्त हौसला बना रखो,
त्याग सदा आलस्य भाव।
नित कार्यों को करते रहिए,
चढ़-चढ़ सदा सत्य की नाव।।
हर दिल नर -नर बस करके,
मुस्कान सदा बिखराए जा।
पीछे ना यूं मुड़के देखो,
कदम - कदम बढ़ाए जा।।
सुमन सरिखे सीखो हंसना,धूम तरह यूं चढ़ना।भ्रमर सरीखे गुन गुन गीत,मारुत इव आगे बढ़ना।।कर अभ्यास सदा मंजिल,सलिल सरीख बनाए जा।,पीछे ना यूं मुड़के देखो,कदम - कदम बढ़ाए जा।।
समता ममता बनाके एकता,
बड़ धर्म मानवता मानों।
सब कोई हैं प्रकृति के बन्दे,
सदा सत्य पहचानों।।
परोपकरिता पल पल कर्म,
निज जीवन अपनाए जा।
पीछे ना यूं मुड़के देखो,
कदम - कदम बढ़ाए जा।।
चढ़ती चंचल चींटी चोटियां,फिसल फिसल नित आगे।एक दिन पा खुद बना लक्ष्य,पल -पल चल - चल जागे।।हर पल कारुष जन समूह में,भाव उत्साह जगाए जा।पीछे ना यूं मुड़के देखो,कदम - कदम बढ़ाए जा।।
कलम से✍️
कमलेश कुमार कारुष
मिर्जापुर

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