काले रंग की लड़की
बहुत सयानी होती है
पर सोचती बहुत है।

वह बाकी से अलग है,
कभी बहुत चुप
और कभी बोलती बहुत
कभी ईश्वर से भी
झगड़ती है
काले रंग की लड़की।
क्योंकि.....
उसे पता ही नहीं होता,
वह कितनी खास है
वह तो नीलकमल सी
दुर्लभ और
नीलम सी खास है।
ईश्वर की श्रेष्ठ कृतियों
में से एक है ।
सबको लुभाता है
सांवला सावन
और काले मेघ।
बसंत में कालीकोयल की
की कूक सुनने
सभी कान लगाते हैं।
सफेद बालों से घबराते
काले लहराते केश
सभी को भाते हैं।
काली कजरारी आंखों के,

दीवाने बहुत होते हैं ।
फिर क्यों काले रंग से
सब मुंह फेरते हैं।
हर काली लड़की में
गोरियों से ज्यादा गुण होते
सुशील और संवेदनशील
काली लड़की को अब मान दें।
आखिर शिव भी तो
नीलकंठ कहलाते।
बजती है बांसुरी जब
काले कन्हैया की
तो आप क्यों सुध बिसराते हैं ।
काले लोगों की
अपनी अनूठी दुनिया
थोड़ा प्यार पाकर
ये देते बहुत खुशियां ।
फिर क्यों सोचती हैं
काली लड़की इतना
नीला समंदर में तो
होती मोती की तलाश है
तारों का पहरा जहां
वह नीला आकाश है।
अंधेरी काली रात में
जुगनुओं का डेरा है।
गोरे चांद को नज़र से
बचाता काला टीका है।
जीवन की उमंगों को
हाथ बढ़ाकर समेट लो ।
तुम काली नहीं हो न तन की
न मन की....।
वह तो लोगों की नज़रों का
खोट है तुम तो जीयो खूब
तुम्हें धरती पर लाने वाले
सबसे खुशनसीब हैं।
✍️-(प्रीति प्रधान)

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