"अस्तित्व"
हाँ मौन हूँ मैं
नहीं दर्द से गौण हूँ मैं
शान्त ठहरी हुई समन्दर सी
उद्वेलित मन लिए कौन हूँ मैं
मैं नहीं हारतीपर हरदम सहतीपढ़ ले जिसे हर कोईवही इबारत मैं लिखती
हूँ मैं सबला
नहीं हूँ मैं अबला
लड़ जाती किस्मत से
बनकर एक जलजला
हिम्मत, हौसलों की मशाल हूँ। ममता की मूरत,धरा विशाल हूँदेवों को गोदी में खिला सकती है जोवो सतीत्व की जीती जागती मिसाल हूँ
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स्वरचित रचना
बृजबाला गुप्ता
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