शीर्षक - भारत का अभिमान ष्पद्मश्री दुलारी
मैं दुलारी हूं
अम्मा -बाबू जी की प्यारी हूं
जन्म हुआ मिथिला में मेरा
मैं एक बिहारी हूं
ब्याही गई तब उम्र कच्ची थी
बस बारह बरस की तो बच्ची थी
ससुराल में कई बरस गुज़ारी हूं
आओ बताऊं मैं दुलारी हूं
महज सात वर्ष में घर छोड़ा
दुःख था मृत बच्चे का
फिर सबसे नाता जोड़ा
वापस मायका लौटी बेचारी हूं
सुनो मुझे मैं दुलारी हूं
घर -घर बर्तन खटका किया
हर दंश सहा पर जीवन जिया
रोक न सका कोई रोड़ा मुझे
मैं वो कुदारी हूं
सुना था श्रद्धा और लगन हो तो भगवान भी मिल जाते हैं
मिट्टी औ कूची में भी रंग भर जाते हैं
जो पहचान मिली मधुबनी से मुझको
उन मिले रस्तों की सदा आभारी हूं
हां आज मैं ष्पद्मश्री दुलारीष् हूं।
स्वरचित
प्रयागी अंशू पाण्डेय

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