शीर्षक - गुलाब
गुलाब है फूलों का राजा
ये सब के मन को भाता
पंखुड़ियां है कोमल कोमल
सुगंध से इसकी मन खिल जाता
कभी देवों के सिर ये सजताकभी माला में गूंथा जाताकांटों से दामन को बचाकरहवा में झूम झूम लहराता
कलियों ने घूंघट पट खोले
डाल डाल पर भंवरे डोले
हर डाली जैसे मुंह से बोले
तितलियों ने अपने पर खोलें
कुदरत के सुन्दर ये नजारेकितने सुंदर, कितने प्यारेखिले हैं चारों तरफ गुलाबआया है बसंत का त्योहार
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स्वरचित रचना
बृजबाला गुप्ता
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