ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

भाग्य विधाता-प्रतिभा पाण्डेय "प्रति" चेन्नई

विधा:- कविता
शीर्षक:-भाग्य विधाता 

गुरुवर सदा नियरे राखिए
अज्ञानता का अंधकार मिट जायेगा,
तिल-तिल छँटता जायेगा अँधेरा
मंज़िल का रास्ता मिल जायेगा।
कमियों को दूर करते रहे हैं
दूर करते रहिएगा,
मुझ मूर्ख को ज्ञानता का पाठ 
पढ़ाते रहिएगा ।
बूंद-बूंद से सागर भरते ,
ज्ञान का ज्योति जलाते,
अंतस से तिमिर हटाते,
नित नये नवल धारा बहाते ,
"प्रति" को प्रतिभा बनाते ,
अपनी दिव्य शक्ति से ,
मेरा सही मार्गदर्शन करते।
जीवन के हर सफर में 
जब अटक जाती हूँ ,
माँ शारदा की कृपा से 
गुरुवर को पा जाती हूँ ,
सिखती हूँ नये-नये आयाम जिन्दगी के , 
इसलिए मैं एक दिन नहीं ,
शिक्षक दिवस हर दिन मनाती हूँ।

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प्रतिभा पाण्डेय "प्रति"
चेन्नई
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