विधा:- कविता
शीर्षक:-भाग्य विधाता
गुरुवर सदा नियरे राखिए
अज्ञानता का अंधकार मिट जायेगा,
तिल-तिल छँटता जायेगा अँधेरा
मंज़िल का रास्ता मिल जायेगा।
कमियों को दूर करते रहे हैं
दूर करते रहिएगा,
मुझ मूर्ख को ज्ञानता का पाठ
पढ़ाते रहिएगा ।
बूंद-बूंद से सागर भरते ,
ज्ञान का ज्योति जलाते,
अंतस से तिमिर हटाते,
नित नये नवल धारा बहाते ,
"प्रति" को प्रतिभा बनाते ,
अपनी दिव्य शक्ति से ,
मेरा सही मार्गदर्शन करते।
जीवन के हर सफर में
जब अटक जाती हूँ ,
माँ शारदा की कृपा से
गुरुवर को पा जाती हूँ ,
सिखती हूँ नये-नये आयाम जिन्दगी के ,
इसलिए मैं एक दिन नहीं ,
शिक्षक दिवस हर दिन मनाती हूँ।
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प्रतिभा पाण्डेय "प्रति"
चेन्नई
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