दूर अंधेरा करता हूं
घर घर शिक्षा दीप जलाता,
दूर अंधेरा करता हूं।
मात पिता आशीष से,
जग में नित्य निखरता हूं।
मात पिता आशीष को लेकर
अपनी कलम चलाता हूं।
शानदार कविताएं लिखता,
अपना शौर्य दिखाता हूं।
मात पिता की अद्भुत छाया
खिलते अद्भुत रंग,
इनकी छाया रहती हर पल,
जीवन रहे उमंग ।
मात पिता आशीष को लेकर,
शिक्षण दीप जलाता हूं ।
गुरुओं के बतलाए मार्ग पर,
कीचड़ कमल खिलाता हूं।
भारत का हर बच्चा बच्चा,
चमके इस संसार।
शिक्षा रूपी दीप जलाकर,
करें जगत उजियार।
बच्चा बच्चा होवे शिक्षित,
मिशन हमारा न्यारा है।
दिनकर" की जगमग किरणों सम,
करना नित उजियारा है ।।
स्वरचित✍️
पंकज सिंह"दिनकर"
(अर्कवंशी) लखनऊ उत्तर प्रदेश

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