ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

सरल कुमार वर्मा उन्नाव,यूपी

बे लिबास तहज़ीब  की इनायत होगी
तोड़कर  आइने  को  सियासत  होगी

जिस्म बेचकर भी जमीर बनाए  रखा
वो  यकीनन ही  कोई  तवायफ होगी

बोलकर झूठ करे तारीफ हासिल जो
सिवा धूर्त के किसकी हिमाकत होगी

वतन बेच रहे सरफरोश आजकल के
कैसे नाचीज़ को उनसे मोहब्बत होगी

निर्वस्त्र कर रहे हैं मां बहन बेटिया जो
क्या इस पीढ़ी की यही विरासत होगी

जिनके बसे न थे गांव  दुनिया में कहीं
कहते हैं कि अब  उनकी इबादत होगी

चुपचाप होकर जो सुन रहे चीखें"सरल"
उनके बेजान दिल में कोई हसरत होगी

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सरल कुमार वर्मा
उन्नाव,यूपी
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