रक्षा बंधन
भाई बहन अटूट मोहब्बत,
ओ पावन रक्षाबंधन पर्व।
है जन जन में हर्षोल्लास,
जिसपे होता सभी को गर्व।।
जिसपे होता सभी को गर्व,सर्व जनों में खुशियां छायी।ओ चम चम राखी की डोर।यूं तन मन को सुख दायी।।
सब सजी कलाई राखी से,
रहे भाई जन खाय मिठाई।
हकीकत में अटूट मोहब्बत,
ओ रक्षा बंधन बहना भाई।।
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कलम से✍️
कमलेश कुमार कारुष
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बहन की दुआएँ
जीवन में ये आँखें तेरी कभी ना हो नम।
जीवन में तेरे खुशियाँ कभी ना हो कम।
रक्षाबंधन पर मैं देती हूँ भैया तुझे दुआएँ,
तेरे जनम-जनम के मिट जाएँ सारे ग़म।।
हैप्पी रक्षाबंधन भैया
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रौशनी अरोड़ा 'रश्मि'
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शीर्षक:- रक्षाबंधन
खिलता महकता घर परिवार
ख़ूबसूरत प्यार भरे पल यादगार,
धमाचौकडी सारे दिन की,
भाई-बहन से है रौशन संसार,
सावन माह लाया पवित्र त्यौहार।
अटूट रिश्तों का मूल्य बताता,रिश्तों का प्यारा चमन खिलाता,रक्षाबंधन प्यार भरा भंडार ,मुबारक सभी को रक्षाबंधन का त्यौहार।
भाई की कलाई
बहन ने रक्षासूत्र से सजाई,
भूल मार पिटाई
प्रेम की ज्योत जलाई,
रोली अक्षत रक्षाबंधन
और रखी मिठाई ,
बड़े प्यार से मनाया ,
राखी का पावन पर्व ,
बड़े चाव से गुलाबजामुन खिलाई।
बहन को मिला उपहार ,आकांक्षा नही अपेक्षा करती हूँबना रहे प्रेम भावना का संसार ,रिश्तों में असीमित प्यार,अपार स्नेह देखभाल जैसा व्यवहार।
रचना मौलिक,अप्रकाशित, स्वरचित और सर्वाधिकार सुरक्षित है।
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प्रतिभा पाण्डेय "प्रति"
चेन्नई
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( अवधी पंच : ३१ )
न आसा सोना सिकडी कै
न थरिया माल मिठाई है
इ भाव विभूषित बंधन है
रक्षा संकलप कलायी है,
इ निष्ठा त्याग समरपन कैपरत्यक्ष पिरेम दिखै अवधीहिम्मति भाई कै बहिन जहांअभिमान बहिन कै भाई है !
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( संजय श्रीवास्तव अवधी )
मनकापुर गोंडा
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रक्षा बंधन
बहना गंगा यमुना जैसी
भाई इंतज़ार में सागर है
दोनों को मिलाने ख़ातिर
त्योहार राखी का आता है,
राखी का त्योहार नहीकरार है बचन निभाने काजो बहना को भाई देताजन्म जन्म तक निभाने का,
आज बांध के राखी अपना
बहना भी यह बचन करेगी
रिश्ता अपना ऐसे ही
कभी ना भाई से तोड़ेगी ।।
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©बिमल तिवारी "आत्मबोध"
देवरिया उत्तर प्रदेश
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कमाना खुद ही पड़ेगा, आसमान से रोटियां नहीं आएगी
बिन मां-बाप की सेवा के, घर में खुशियां नहीं आएगी
क्यों मार देते हो कोख में अक्सर मासूम बेटियों कोकैसे त्योहार मनाओगे,जब घरों में बेटियां नहीं आएंगी
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देवेंद्र चौहान
सीतापुर
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किरीट सबइया
बादर केर सिनाक नहीं,
भुंइ का बिन पानिन कै तरसाबत।
सूरुज तौ खिसियान लगै,
कनुआइ तकै अँगरा बरसाबत।
पेंड़ निहारि थकें बदरी,
अब सामन खींस निकारि बिराबत।
"राघव"लागत जेठ लगा,
उतजोग कहौं कुछ काम न आबत।।
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आंखिन मा घुसुरीं बदरी,
दिनरात नदी कस धार बहाबत।
बाहर ताकि रहीं बपुरी,
बदरी बिछुड़ी मधुमास न भाबत।
खेतन धूरि उड़ै जमिकै,
पपिहा न पिया कइ याद जगाबत।
आगम देखि भुलान सबै,
दुइ बूंद निता अब देउ मनाबत।।
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राघव प्रसाद विश्वकर्मा*राघव"
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मै भी उड़ना चाहती
सपनों में जीना चाहती,
जिंदगी से लडना चाहती हूं
मै जीवन को तलाशना चाहती हूं,
हीरे की तरह चमकना चाहती ,
संस्कारों के परदे को हटाना चाहती,
मै दुनिया की बेडियों से आजाद होना चाहती हूं,
कमबख्त जिंदगी को कुछ देना चाहती हूँ
अपना आशय लेकर पंख फैलाना चाहती हूं।
ऐ जिंदगी,
बस एक मौका खोजना चाहती हूँ।
मंजिल की खोज में ,
भटकना चाहती हूं।
जीवन मे कुछ करना चाहती हूँ |
जिंदगी से लडना चाहती हूं
मै जीवन को तलाशना चाहती हूं,
हीरे की तरह चमकना चाहती ,
संस्कारों के परदे को हटाना चाहती,
मै दुनिया की बेडियों से आजाद होना चाहती हूं,
कमबख्त जिंदगी को कुछ देना चाहती हूँ
अपना आशय लेकर पंख फैलाना चाहती हूं।
ऐ जिंदगी,
बस एक मौका खोजना चाहती हूँ।
मंजिल की खोज में ,
भटकना चाहती हूं।
जीवन मे कुछ करना चाहती हूँ |
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नौशाबा जिलानी सुरिया
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रक्षा-बंधन
रक्षा करे न करे पर रक्षा सूत्र अवश्य बने
सूत्र ने ही तो जग जोरा तन जोरा
जोरा चीवर थान!
सूत्र ने तो कभी न बंधन तोडा
सूत्र ने ही तो जग जोरा तन जोरा
रक्षा करे न करे पर रक्षा सूत्र अवश्य बने
ये रिश्ते नाते एक सूत्र से ही बधे
सूत्र ही जग में खाली जगह को भरे!!
रक्षा करे न करे पर रक्षा सूत्र अवश्य बने !
सूत्र ने जग जोरा तन जोराजोरा चीवर थानजोरी प्रेम नाम की डोरीजोरा सब भाइप चार औ परिवारहम जब खून के ,बधन बध गएऔर कौन सा बंधन बाकी है!बाकी एक सूत्र नाम की डोरीजो भर दे हर जखमो कोरक्षा करे न करे पर रक्षा सूत्र अवश्य बने !
सूत्र ने जग जोरा तन जोरा
जोरा चीवर थान
जो सूत्र बना हो गये गौतम बुद्ध कबीर महान! !
रक्षा करे न करे पर रक्षा सूत्र अवश्य बने !!
कलम क्रांति का दर्पण! !





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