शब्द सनातन पर
भारत धर्मनिरपेक्ष बता कर,
कितना कुछ कर जाते है,
कुछ बे अक्ल बिना सोचे,
सनातन पे चढ़ जाते है !
क्या अधिकार मिला है उसको,
जिसने है अपमान किया,
"सनातन खत्म चाहिए करना"
क्यों ऐसा बयान दिया?
खुद की नस्ल नहीं देखी,
क्यों कहा "सनातन को डेंगू?"
ऐसे नीच अभागों को,
अब गाली ना तो क्या बोलूं?
नहीं खिलौना धर्म सनातन!
जो चाहे वो खेल रहा,
जो कुछ भी मन में आया,
सो ऑन कैमरा बोल रहा!
खुद तो दिखते है मच्छर,
औरों को डेंगू कहते है,
ऐसे भिन्न भिन्न वाले मच्छर,
बिन थप्पड़ खाए ना रहते है!
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- आदित्य कुमार
(बाल कवि)
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