ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

भूख-आलोक अजनवी

लघु कथा:  भूख

जैसे ही गाड़ी की गति धीमी होने लगी, रेल में बैठे उस युवक को भूख व्याकुल कर दिया। प्लेटफार्म पर उसने कुछ खाने को लिया और वापस अपनी बर्थ पर आकर बैठ गया।
तभी सामने की बर्थ पर एक 20-25 साल  नवयुवती जो देखने में भिखारिन लग रही थी, आकर बैठ गई। युवती देखने में सुंदर थी और गोद में एक दूध पीता बच्चा लिए हुए थी।
वह नवयुवती को देखने लगा और उसके शरीर का सुक्ष्म निरीक्षण करने लगा। अचानक बच्चा रोने लगा तो युवती ने उसे अपना दूध पिलाना आरंभ कर दिया।
दुपट्टा ना होने की वजह से वह अपने वक्ष छिपाने में असमर्थ थी।
युवक की नजर उस के निजी अंगों को घूरने लगी।
उसे फिर "भूख" सताने लगी।

© आलोक अजनबी

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