"आखिर मैं चूम लिया सतह को तेरीमैं इंसान हूं नहीं हारना फितरत मेरीगलतियों को सुधार कर दौड़ता हूं मैंऔर कभी पीछे नहीं मुड़ता हूं मैंहौसला हिम्मत ईमान और ज्ञान हूं मैंमहज़ एक यंत्र नही, जमी का जान हूं मैंचंद्रयान हूं मैं, मुकम्मल हिंदुस्तान हूं मैं "
अपनी छटा बिखरा बिखरा गया भारत का तिरंगा।
दुनिया के मन को भा गया भारत का तिरंगा।
चोटी पे जो हिमालय के फहराता था कभी,
लो चांद पे फहरा गया भारत का तिरंगा।।
चन्द्र यान -3 की अद्भुत सफलता पर भारतीय वैज्ञानिकों और भारत वासियों को बहुत बहुत बहुत बधाइयाँ।
विश्व गुरु भारत की जय जय जय।।
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कुण्डलिया
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चन्दा मामा के घरे,लगी जाइ का होड़ि।इसरो धुज फहराइगा,सबहीं पाछे छोंड़ि।।सबहीं पाछे छोंड़ि,चीन जापान चाइना।अमरीका औ रूस,निहारिन आजु आइना।।भारत के दरम्यान,चला ना कउनौ ड्रामा।गले मिलें लपटाइ,प्यार से चन्दा मामा।।
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*राघव प्रसाद विश्वकर्मा "राघव"*
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