रानी दुर्गावती पर गीत
भारत माता भरी हुई है नारी के बलिदानों से।
मातृभूमि की रक्षा में खेली है होली प्राणों से।।
त्याग हमारी मां बहनों का निर्भय कौन चुका सकता।
वीर बेटियों की कुर्बानी कैसे देश भुला सकता।।
भूल न जाना भूल न जाना याद दिलाने आया हूं।महारानी दुर्गा का मैं इतिहास बताने आया हूं।।
पांच अक्टूबर पावन दिन था जब दुर्गा ने जन्म लिया।
पंद्रह सौ चौबीस ईसवी कालिंजर खुशहाल हुआ।।
दुर्गाष्टमी की पूजा का लोगों में जश्न चरम पर था।
कीरत राय भूप का लेकिन केवल ध्यान हरम पर था।।
सुनकर समाचार कन्या का राजाजी हर्षाए थे।पूरे कालिंजर ने उस दिन भी गीत बधाई गए थे।तेजस्वी उस बाल परी को बामन दुर्गा नाम दिया।भाग्यवान अतिसुंदर कन्या का शिव ने उपहार दिया।।
तीर कमान और बंदूकें उसके यही खिलौने थे।
युद्ध कला में उसके आगे वीर योद्धा बौने थे।।
फुर्ती थी चीते-सी उसमें ज्वाला थी चिंगारी थी।
बेटी वीर देश की थी चीते की गजब शिकारी थी।।
रानी बनी गोडवाना की दुर्गावती नाम पाया।दलपत शाह ब्याह कर लाए गढ़ मंडेला हरसाया।।
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चंद्रवीर सोलंकी निर्भय
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