गीत का शीर्षक ...आओ उन्हें याद करें,
स्वतंत्रता दिवस, मिलजुल कर सब् मनाएंस
गीत उनकी यादों में, फिरसे हम गुनगुनाएसस
भगतसिंह,सुखदेव,बिस्मिलऐसे थे राजगुरु,जो कहते पहले फांसी मुझसे करो शुरू,,सुभाष ,शेखर और अशफाक उल्ला खान,तमाम वीरआजादी के लिए हुए थे कुर्बान,,न जाने कितने वीर, माली थे इस चमन के,देते हैं गवाही इनकी तारे सभी गगन के,,दीप उनकी यादों में हम हर दिन जलाएंसस्वतंत्रता दिवस मिलजुल कर सब मनाएं स
ईर्ष्या, द्वेष में राज अपना लुटाया था सब,
हमसे मुगलों नेउनसेअंग्रेजों ने छीना था,,
लक्ष्मी शिवाजी और राणा के प्रताप से,
अंग्रेजों को फिर आया खूब पसीना था,,
वीरों की शौर्यगाथा आओ सबको बताएंस
स्वतंत्रता दिवस मिलजुल कर सब मनाएंस
कुछ नेताओं के कर्मों से जो बट गया,कुर्बानी के नक्शे से कैसे वह हट गया,,ऐसा कुछ कर फिर कोई नजर ना डालें,मातृभूमि को अब मिलकर सब संभाले,,हर एक आंख का होअब यही सपना,हो रंग एकता का, इतना ख्याल रखना,,तस्वीर भारत की, जब भी हम बनाएंपस
स्वतंत्रतादिवस,मिलजुल कर सब मनाएंस
गीत उनकी यादोंमें, फिरसे हम गुनगुनाएसस
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पं पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार
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