ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

किसान-कलम से✍️ कमलेश कुमार कारुष मिर्जापुर

🙏&किसान&🙏


किसान  लगा  जान  बना  शान  का प्रतीक  है,
अथक लगन में कर जगन  परिश्रम  में नीक है,
जाड़ा हो या बरसात हो अथवा गर्मी का गर्म लू,
वो होता नही विचलित  हर  मौसम  में ठीक  है।

उषा पूर्व त्याग आसन वह  जाता अनाज  बोने,
नुकसान  की   आशंका   में   त्याग  देता  सोने,
विना  परिश्रम  कुछ  ना  होता  सुलभ जहां  में,
सतत निगरानी करता कहीं कुछ जाये ना खोने।

किसान   धरा   पूजते  यूं   मान   करके  माता,
अवनि अन्न देती जिसे जन  जन  समूह  खाता,
अगर   किसान   किसानी    ना   करते  जनाब,
भूखमरी  कगार   में  आ  पूरा  देश  मर  जाता।

आजके परिवेश में किसान पा  रहा  है शोषण, 
फिर भी हर गमों को सह वो कर रहा है पोषण, 
अक्सर  किसान  तो  डूब  कर्ज  में सरकार के,
आत्महत्या कर कर  कारुष  मर  रहे कुपोषण।

...............................................................................
कलम से✍️
कमलेश कुमार कारुष 
मिर्जापुर

Post a Comment

0 Comments