👉कमर तोड़ महंगाई👈
(तर्ज- हम उनसे दिल लगाके)
महंगाई के दौर में हम, दिन रात रोतें हैं।
गरिबों से पूछो हाल, बिन खाये सोते हैं।।
बढ़ा पेट्रोल, डीजल, महगाई डायन,
सरसो के तेल महगा, होई कैसे खायन,
कमर तोड़ महगाई अब, सर पे ढोते हैं,
गरिबों से पूछो हाल, बिन खाये सोते हैं।
बाटे मजदूरी कम, पर मजबूरी खर्चा,
जीडीपी दर हुआ कम, देश गर्त चर्चा,
होई केन गुजारा, प्रति पल सोचते हैं,
गरिबों से पूछो हाल, बिन खाये सोते हैं।
दिनो दिन गरीब, गरीब होत जाता,
लूटि लूटि अमीर, सिगरो धन खाता,
देश प्रगति के राह पर, झूठी बातें बोते हैं,
गरिबों से पूछो हाल, बिन खाये सोते हैं।
कलम से✍️
कमलेश कुमार कारुष
मिर्जापुरी

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