नशा
कईयों कीमांग का सिंदूरतो कईयों कीकोख उजड़ गईइस नशे नेबर्बाद कर दीकईयों की जिंदगानियां
पैसे की
शरीर की
और इज्जत की
होती है तबाहियां
लोग फिर भी
न जाने
क्यों झेल रहे हैं रुसवाईयां
"राजस्थानी"संभल जाओअब भी वक्त शेष हैवरनावक्त से पहले हीतुम्हारीरह जाएगी निशानियां.
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✍️- तुलसीराम "राजस्थानी"


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