ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

नशा-तुलसीराम "राजस्थानी"

नशा

नशे में 
डूबती जा रही 
आज की युवा जवानियां
नशे ने छीन ली 
कई 
बूढ़े मां-बाप की दवाईयां

कईयों की 
मांग का सिंदूर 
तो कईयों की 
कोख उजड़ गई 
इस नशे ने 
बर्बाद कर दी 
कईयों की जिंदगानियां 
पैसे की
शरीर की
और इज्जत की 
होती है तबाहियां
लोग फिर भी
न जाने 
क्यों झेल रहे हैं रुसवाईयां 

"राजस्थानी"
संभल जाओ 
अब भी वक्त शेष है
वरना 
वक्त से पहले ही 
तुम्हारी 
रह जाएगी निशानियां.

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✍️- तुलसीराम "राजस्थानी"

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