ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

कलम का प्रतिबिंब-पंकज सिंह दिनकर (अर्कवंशी) लखनऊ उत्तर प्रदेश

मुक्तक
शीर्षक_कलम का प्रतिबिंब

हूं प्रतिबिंब कलम का अपनी कलम हमारी जान है।
धारदार रचनाएँ रचती कलम हमारी मान है।
कलम हमारी सत्ता शोहरत कलम हमारी ताकत।
कलम हमारी देश समर्पित कलम हमारी शान है।।

रचनाकार✍🏽
पंकज सिंह दिनकर (अर्कवंशी)
लखनऊ उत्तर प्रदेश

Post a Comment

0 Comments