श्याम बेनेगल,सिनेमा के प्रेम चंद थे-राकेश वेदा लखनऊ 30 दिसंबर । पटकथा लेखक, फिल्म निर्माता व निर्देशक, पद्म भूषण,पद्म श…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️कैद हो जाएगी कलम जब अखबार रनजुर हो जाएंगे लोकतांत्रिक मुल्क में तब हिटलर मशहूर हो जाएंगे बेहयाई फिर जश्न करेगी चढ़कर…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️परिंदे सब बहुत हतास है मेरे शहर में शजर निगलता विकास है मेरे शहर में मिलकर नेता अफसर अखबार नवीस करते फंड…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️आंख में जब दिल की नमी आई बाद उसके ही शायरी आई गर्दिशो में गुजरती गई जिंदगी ठोकरों से रफ्तगी आई देख…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️चुभता है आंखों में जो हसीं नजारा था कभी है जान का दुश्मन जो बहुत प्यारा था कभी करवट बदलता है वक़्त तो आहट नहीं ह…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️अब इम्तहान जीस्त में आया है दोस्तो मुद्दत हुई फिर तुमको पुकारा है दोस्तो बिक रहे हैं इस कदर रिश्ते सरे बाज़ार रिश्तों क…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️जब कभी गम में मुस्कुराता हूं दर्द जमाने के करीब पाता हूं सुरमई शाम छुप गई थी जहां उस दरख़्त के तले चैन …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️लालच, गुरूर, पैसा, यकीं तार तार करता है जहा में इंसा ही मगर इंसा पर ऐतबार करता है नसीहत शाहीन की फना हो जाएगी दु…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️क्या दुश्मन क्या दोस्त , हर कोई अपना अपना काम कर रहा है। हारेगा वही जो आराम कर रहा है, और जीतेगा वही जो लक्ष्य पर काम क…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️लोग जी रहे जैसे जिंदगी ही नहीं कोई धड़कन दिल में रही ही नहीं ऐसे मायूस हुए हैं हम आजकल कोई हसरत दिल में रही ही नह…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️बड़े खुदगर्ज है जो कह रहे अपनी जुबानी है दिलो को तोड़ने का खेल ही उनकी कहानी है जरा सा मुल्क के हालात पर भी गौर फरमाए …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️बे लिबास तहज़ीब की इनायत होगी तोड़कर आइने को सियासत होगी जिस्म बेचकर भी जमीर बनाए रखा वो यकीनन ही कोई तवायफ हो…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️खबर माल बन रही इश्तहार के पीछे बखूबी दुकान चल रही अखबार के पीछे पहले हुई पीली फिर काली हुई खबर अब रह गई है …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️देखकर दुनिया ने जिसकी हंसी उड़ाई थी मै नहीं था वो मेरे दर्द की परछाई थी धीरे धीरे सब अपने कह गए अलविदा मुझे स…
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