ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

चंद्रघंटा-श्रीमती संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया शिक्षिका भोपाल मध्यप्रदेश

विषय- चंद्रघंटा

आज भू-लोक मॉं चंद्रघंटा आई हैं।
हम सबके उर हर्ष अपार छाई हैं।
जो मॉं को नित ध्याता,
उसके संकट क्लेश दूर हो जाता।

द्वार-द्वार तुम्हें पूजा जाता।
तुम्हारी आराधना की जाती।
तुम्हारी उपासना की जाती।
तुम्हारे नाम का जाप नित जो करता।

उसकी मनोकामना निश्चित,
पूर्ण हो जाती।
मॉं को मनाने कोई निराहार,
कोई निर्जला उपवास करता।

मंदिर-मंदिर घंटा ध्वनि बाजे।
माता रानी के जयकार ध्वनि,
सारे ब्रह्मांड गूॅंजे,
मॉं चंद्रघंटा भक्तों को अपना आशीष देवें।

मौलिक स्वरचित रचना
श्रीमती संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
शिक्षिका भोपाल मध्यप्रदेश

Post a Comment

0 Comments