सूरज के उगने की खुशी में कुछ गाने लगे विहंग।
कलरव करती और मनोरम दिखती प्यारी गंग।।
वीणा पाणिनि मां भर देतीं सुर में नई तरंग।
फूलों और कलियों में दिखती हर पल नई उमंग ।।
इक सूरज क्या ढला सितारों को चमकना आ गया ।
इक फूल क्या खिला हर कली को महकना आ गया।।
इक बार क्या पी उनकी नजरों से सौ बार बहकना आ गया।
इक चिंगारी क्या लगी दिल में पानी में भी दहकना आ गया।।
जय हिन्द, जय साहित्य
हरेन्द्र विक्रम सिंह गौड
घायल परिन्दा
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