ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

पढ़ो लिखो आगे बढ़ो-पंकज सिंह "दिनकर" (अर्कवंशी) लखनऊ उत्तर प्रदेश

पढ़ो लिखो आगे बढ़ो

एक छोटी सी आशा मेरी शिक्षित होवे यह संसार।
पढ़ो लिखोआगे बढ़ो खुशियां तुमको मिलें हजार।
सादा जीवन उच्च  विचार काम करो  कुछ हटके।
जीवन  पथ   रोशन  हो  जावे  करो  पढ़ाई डटके।

जीवन  एक    संग्राम   है  कभी   ना   मानो  हार।
कर्म  करो बन  जाओ  ज्ञानी  अद्भुत   गीता  सार।
बात पूर्वजों   की धारण कर   चलो  सत्य की राह।
राह  पड़ें    कितने   भी   रोड़े   करो  नही  परवाह।

कठिन परिश्रम  नव नित  करना होना नही हताश।
अपने   अद्भुत    कार्य  से  जग   में   करो  प्रकाश।
धैर्यवान    धीरज   से     रहते   होते   नहीं    अधीर।
धैर्यवान   प्रभु    राम    सम   बन  जाओ  रण  धीर।

चलो    राह     संघर्ष   की   खिल   जाए  रंग   रूप।
जीवन  पथ   रोशन हो  जाए  चमके दिव्य  स्वरूप।
जीवन है दुख सुख का संगम कभी शूल कभी फूल।
कलमकार  दिनकर की  कविता रहे  सदा अनुकूल।।

रचनाकार✍️
पंकज सिंह "दिनकर"
(अर्कवंशी) लखनऊ उत्तर प्रदेश

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