ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
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हिंदी से परहेज-राजेन्द्र सिंह श्योराण
कौन हूं मैं-पूनम सिंह भदौरिया (दिल्ली)
मौत को जिंदगी के करीब देखा-आलोक अजनबी
प्यारी हिंदी-आलोक अजनबी
हिंदी के उत्संग में, वैश्विक मैत्री सत्संग-
एर. तरुण बंदा टीम खत्री महासभा पंजाब संगरूर पंजाब, भारत
विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष में-पूनम सिंह भदौरिया
मेरी हिन्दी-प्रतिभा पाण्डेय "प्रति"
श्रीराम-तरुण बांदा पंजाब
सुषमा श्री निधि,राम की परम स्तुति में-महेन्द्र कुमार
अवध का भाग्य
आनंद की पराकाष्ठा, चिन्मय पथ पर
हरेंद्र विक्रम सिंह
लिखो एक नया इतिहास,उत्साह उमंग जोश से
विवश हूँ फिर भी-प्रतिभा पाण्डेय "प्रति" चेन्नई
लेखक/रचनाकार-पंकज सिंह दिनकर *(अर्कवंशी) लखनऊ उ.प्र.
हरेंद्र विक्रम सिंह
आलोक अजनबी  रोहतक ( हरियाणा)
नई उमंगें सज रहीं,बाईस जनवरी अभिनंदन में
चेहरे की किताब-आलोक अजनबी
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