🚩वैदिक विचार व कर्म ॐ नाम निज प्रणव प्रभू का और नाम सब गुण अनुशंसी। ब्रह्मा विष्णु महेश एक हैं,कर्ता,धर्ता,हर्ता त्र…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️❤ महुआरी लरचे डारि लता कतहूँ,अरु फलबिंदु कतौ,मोतियन सन झलकें , छिछनाई गिरे महुआ कतहूँ, तरु महुआरी नयन रिझावें पुलकें। उ…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️गुरुआश्रम में पग रखलं कुंअरजी, पढलंँ,ना तजलं पर हरि क ध्यानी। आसुरी ज्ञान सोहाइल नहिं उनके, ना धरलं मनआसुरी ज्ञान विज्ञ…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️अनुबन्ध ❤ प्रीति का नीति से कौन अनुबन्ध है, नीर का मीन से कौन सम्बन्ध है ? श्रोत पीयूष बहता जहाँ हो अथक, आचमन पर नही…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️आत्म -प्रबोध मानव मन के उच्छवासों में, विश्वानिदेव का उर्मिल प्रभ हो । हिरण्यगर्भ के ज्योति कलश से, धरा सहित आलोकित नभ…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️~🚩🚩🚩~~ " भगवा "~~~🚩🚩🚩~ रंग नहींं है केवल भगवा, केशर रंग उड़ाता भगवा, रंग बसंती चोला भगवा, राष्ट्र पुर…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩सृष्टि कर्ता विश्वकर्मा प्रजापतिः(ऋग्वेद दशम्- मण्डल) न मृत्यु थी न अमरत्व था, नही कोई तत्व था, न रात्रि थी न दिवस थ…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️शत नमन है वर्तिका तूलिका और वर्तिका, हैं कर्म ज्योति संगिका, अग्नि उर में वासिका, हैं उर्मि की ये दीप्तिका। पथ प्रशस्…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️!! शकुन्तरी !! कज्जल सी रात गहरी,थी निशा भी मौन पसरी, नयनों में ना थी निद्रा,पलकों की थिर थी बल्लरी। गिन रही थ…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️भाग-3 नयना एक आँख से देखिहं नयना, कउन भाव दरसइहं नयना। ललचइहं तिरिया क लोचन, कउन कामना …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🌈वैदिक धर्म के पुनरुद्धारक जगद्गुरू शंकराचार्य हे! धर्म ध्वजी,हे! धर्म के रक्षक, वैदिक धर्म के वेदम् -व्यासी। हे! त…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️2->नयना खिलत,मिलत,बोलत,हरिसत हँ, रिझत, खिझत,नटियात हँ नयना। आँख चुरावत लजियात हँ नयना, भाव भंगिमा,…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️नयना नयनन में भी चंचल बानी हⵢ, रसिकन सन चपल रवानी हⵢ । कबहुं ठुमकि रहि,बइठंँ…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द -14 अनुताड़ित व अनुप्रेरित करके, व्यथित हृदय से बोले ऋषिवर। "नर केहरी"की संगिनी …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द-13 स्वामी सर्वदानन्द जी वीतराग थे, थे त्यागी,योगी, व तपी,तपस्वी। परमार्थ के वे जीवन्त मूर्ति…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩 महर्षि दयानन्द-12 वैदुष्यपूर्ण टीका को करते, तंत्र मंत्र के कलुषित कर्मा। शव साधना श्मसान भूमि में, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द-10 सुकन्यायें होवें वेद-प्रवीना, शारदा और विदुषी कहलायें। नारी शिक्षा के परम थे पोषक, आर्य कन्या विद…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩 महर्षि दयानन्द-9 सन् सत्तावन के महासमर के, महामंत्र का था, वह उद्गाता । वो मानवता का उन्नायक औ' भूतल का था भाग्…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द-8 विकृतियाँ सारी धर्म नाम पर, क्षेपित प्रदूषण फैल रहा था। राष्ट्रीय अस्मिता मर्दित होकर, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द-7 विजय पताका वेद ज्ञान का, लेकर अपने बाहू भुज द्वै में। अलख जगाने निकल पड़ा वो, आसेतु…
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