नयना : भाग-4 तुलसी क जब पगलइलं नयना, मुरदा के लट्ठ समझलं नयना। चढ़ गइलं कोठा पर जा ससुरे, सरप के रसरी समझलं नयना।। …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️भाग-3 नयना एक आँख से देखिहं नयना, कउन भाव दरसइहं नयना। ललचइहं तिरिया क लोचन, कउन कामना …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️2->नयना खिलत,मिलत,बोलत,हरिसत हँ, रिझत, खिझत,नटियात हँ नयना। आँख चुरावत लजियात हँ नयना, भाव भंगिमा,…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️नयना नयनन में भी चंचल बानी हⵢ, रसिकन सन चपल रवानी हⵢ । कबहुं ठुमकि रहि,बइठंँ…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द -14 अनुताड़ित व अनुप्रेरित करके, व्यथित हृदय से बोले ऋषिवर। "नर केहरी"की संगिनी …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️संघर्ष का महत्व जिसने आत्मबोध कर लिया मैं अपना खुद उद्धारक हूं वह जीवन में संघर्षों को चुनते हैं वह ही एक दिन इतिहास र…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द-13 स्वामी सर्वदानन्द जी वीतराग थे, थे त्यागी,योगी, व तपी,तपस्वी। परमार्थ के वे जीवन्त मूर्ति…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩 महर्षि दयानन्द-12 वैदुष्यपूर्ण टीका को करते, तंत्र मंत्र के कलुषित कर्मा। शव साधना श्मसान भूमि में, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द-10 सुकन्यायें होवें वेद-प्रवीना, शारदा और विदुषी कहलायें। नारी शिक्षा के परम थे पोषक, आर्य कन्या विद…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩 महर्षि दयानन्द-9 सन् सत्तावन के महासमर के, महामंत्र का था, वह उद्गाता । वो मानवता का उन्नायक औ' भूतल का था भाग्…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द-8 विकृतियाँ सारी धर्म नाम पर, क्षेपित प्रदूषण फैल रहा था। राष्ट्रीय अस्मिता मर्दित होकर, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि दयानन्द-7 विजय पताका वेद ज्ञान का, लेकर अपने बाहू भुज द्वै में। अलख जगाने निकल पड़ा वो, आसेतु…
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩स्वामी दयानन्द-6 सदगुरु पाने का अभिलाषी, भारत भ्रमण चला सन्यासी। हिम-गिरि के गुह-कंदर में, भटक रहा था, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩 स्वामी दयानन्द-5 हुआ प्रकम्पित पुत्र देख, थे कुपित पिता भी हुए शांत। "बहकावे में मैं था आया", …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩स्वामी दयानन्द-4 कन्या रत्न को करूं समर्पित, कुलभूषण वर को सबनें चाहा। प्रणय सूत्र में बंध न सका वो, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩स्वामी दयानन्द -3 कुलरीति रहा शिव-रात्रि में पूजन, रात्रि जागरण, व कीर्तन-अर्चन। दिन भर तो भूखे रहे व्रती सब, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩स्वामी दयानन्द-2 चोर,हीन,निकृष्ट व काफि़र,पर्यायी , "हिन्दू"कहकर सब उपहास कर रहे। …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️🚩महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती 🙏 युग युग जलता रहा दीप जो, अपनी संस्कृति का धरा गगन में। था लगा अचानक वह बुझने, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️वैदिक विचार व कर्म 🚩वै.वि.व कर्म-11 इस काफिर को लटका दो फाँसी, सरेआम राजमार्ग के चौराहे पर। इन्सानी इसमें रुह नहीं, …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️वैदिक विचार व कर्म 🚩 वै.वि.व कर्म-9 काली चन्द राय उर्फ काला पहाड़ बंगभूमि के मुस्लिम शासक की, इक प्राणप्रिया एकल बेटी …
और पढ़ें 👨🏫🧑🏫👩🏫🖋️Copyright @ 2025-26 Gurukul Akhand Bharat All Right Reseved A Charitable Trust Registered Under Govt. of India
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